सोचता बहुत हूं, बोलता नहीं
बोलना मना है,
और सत्य बोलना तो जुर्म
जब देखता हूं
भीड़ को
यहां से वहां तक
सब के सब शरीके जुर्म हैं
कोई जमानत पर है
तो कोई फरार है।
----दुष्यन्त कुमार